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नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री 2025: एक नया अध्याय


                          PM - सुशीला कार्की 

परिचय

नेपाल इस समय ऐतिहासिक राजनीतिक मोड़ से गुजर रहा है। सितंबर 2025 में सप्ताहभर चले जेन-ज़ी (Gen-Z) आंदोलन के बाद, नेपाल के राष्ट्रपति ने संसद भंग कर दी और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह पहली बार है जब नेपाल में कोई महिला प्रधानमंत्री बनी हैं।


पृष्ठभूमि: बदलाव की वजह

  • सरकार द्वारा सोशल मीडिया बैन लागू किए जाने के बाद युवाओं और नागरिकों में भारी गुस्सा फैल गया।
  • जेन-ज़ी आंदोलन तेज हुआ, जिसमें भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और जवाबदेही की मांग उठी।
  • प्रदर्शन हिंसक हो गए—कम से कम 51 लोगों की मौत और हज़ार से अधिक घायल हुए।
  • बढ़ते दबाव में प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने इस्तीफ़ा दिया और मार्च 2026 के लिए नए चुनाव घोषित किए गए।

कौन हैं सुशीला कार्की?

  • पेशेवर पृष्ठभूमि: 2016-2017 में नेपाल की मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं।
  • महत्व: नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश और अब पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
  • जिम्मेदारी: देश में शांति बहाल करना, हिंसा और भ्रष्टाचार की जांच कराना, और मार्च 2026 तक निष्पक्ष चुनाव कराना।

आगे की चुनौतियाँ

  1. राजनीतिक स्थिरता: आंदोलन, दलों और संस्थाओं के बीच संतुलन बनाना।
  2. हिंसा की जांच: प्रदर्शन के दौरान हुई मौतों और घायल लोगों के लिए न्याय।
  3. भ्रष्टाचार विरोधी कदम: नागरिकों की पारदर्शिता और सुधार की मांग पूरी करना।
  4. निष्पक्ष चुनाव: भरोसेमंद और स्वतंत्र चुनाव कराना।
  5. युवा वर्ग का विश्वास जीतना: जेन-ज़ी आंदोलन की भावनाओं को सही दिशा देना।

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय असर

  • यह बदलाव पड़ोसी देशों में भी युवा आंदोलनों को प्रेरित कर सकता है।
  • भारत और चीन के साथ नेपाल के संबंध इस दौरान और महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
  • वैश्विक स्तर पर नेपाल की छवि लोकतांत्रिक बदलाव की मिसाल बन सकती है।

नेपाल के नागरिकों के लिए इसका मतलब

  • महिलाओं के लिए ऐतिहासिक जीत—राजनीति में बड़ा मुकाम।
  • भ्रष्टाचार-मुक्त शासन और पारदर्शिता की उम्मीद।
  • लेकिन साथ ही अनिश्चितता भी, क्योंकि आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं।

निष्कर्ष

सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक शक्ति की जीत है। यह महिलाओं और युवाओं दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आने वाले चुनाव और उनकी नीतियाँ तय करेंगे कि यह बदलाव नेपाल को स्थायी सुधार की ओर ले जाएगा या सिर्फ़ एक अस्थायी अध्याय रहेगा।

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