- शीर्षक उदाहरण:
“GST 2.0: भारत में नया GST स्लैब चार्ट (2025) – सब कुछ जानें (5%, 18%, 40%)” - मेटा वर्णन:
“जानिए GST 2.0 के तहत नए GST स्लैब—5%, 18%, और 40%—कब से लागू हुए, कौन-सी चीजें सस्ती हुई, कौन-सी महँगी, और कैसे बदल गया टैक्स स्ट्रक्चर।”
- मुख्य: GST 2.0, नया GST स्लैब चार्ट, GST दरें 2025, GST में बदलाव, GST स्लैब भारत
- वैरिएंट्स/लंबी पूंछ वाले (long-tail):
- “नया GST स्लैब चार्ट 5 18 40 प्रतिशत”
- “GST 2025 में क्या बदला”
- “सस्ता हुआ क्या—GST कटौती सूची”
- “Luxury goods पर 40% GST क्यों?”
परिचय
- संक्षेप में बताएं कि GST Council ने 56वीं बैठक में स्लैब को सरल किया—पिछले 4 स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) से अब मुख्य रूप से दो और एक नया हाई स्लैब:
- 5% (मूलभूत वस्तुओं के लिए – Merit Rate)
- 18% (आम वस्तुएं और सेवाएँ – Standard Rate)
- 40% (लग्जरी एवं Sin Goods – Demerit Rate)
प्रमुख बदलाव
- मूलभूत वस्तुएँ (5%): जैसे रोजमर्रा की चीज़ें—घरेलू सामान, personal care items, daily essentials जैसे दूध, दवाएँ, टूथपेस्ट आदि
- आम वस्तुएँ (18%): इलेक्ट्रॉनिक्स, छोटे वाहन, अधिकांश सेवाएँ—20–28% से अब 18% तक इकठ्ठा
- लग्जरी और Sin Goods (40%): उच्च शिष्टाचार की चीज़ें जैसे लग्जरी कारें, एयरक्राफ्ट, तंबाकू, पैकड मीठे पेय, gambling services आदि पर 40% टैक्स
- कुछ चीज़ों की GST 0% (exempt): जीवन, स्वास्थ्य बीमा, शिक्षा, चिकित्सा सामग्री, फार्मास्यूटिकल्स आदि पर टैक्स हटाया गया
कब से लागू हुआ?
- ये बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू हुए—Navratri के आरंभ से लागू हों, जैसा Finance Minister द्वारा घोषणा किया गया था
प्रभाव—कौन लाभान्वित? और कौन प्रभावित?
- लाभ: दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, personal care उत्पाद, जीवन/स्वास्थ्य बीमा, होटल रूम्स (₹7,500 तक) पर 5% टैक्स—उपभोक्ता पर खर्च घटा
- कैसे व्यापार से जुड़े लोग देख रहे हैं:
- वाहन कंपनियाँ जैसे Maruti, Volkswagen, Royal Enfield ने कीमतों में कटौती की घोषणा की—GST लाभ सीधे ग्राहकों को मिला
- व्यापारी वर्ग (जैसे प्रयागराज के व्यापारी) उत्साहित हैं, लेकिन इन्वेंट्री और ITC के पुराने भुगतान को लेकर चिंतित भी
निष्कर्ष और सलाह
- सरल टैक्स प्रणाली—GST 2.0 ने स्लैब को कम किया, compliance आसान किया, और महंगाई को नियंत्रित करने का प्रयास किया (inflation में लगभग 1.1 प्वाइंट कमी अनुमानित)
- सुझाव: पाठकों को सलाह दें कि वो अपनी खरीदारी की योजना GST rate बदलाव के अनुसार बनाएं और व्यवसायी आयकर या टैक्स सलाहकार से संपर्क करें।

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